वीरभद्र गायत्री मंत्र – Veerbhadra Gayatri Mantra

वीरभद्र, भगवान शिव के परम आज्ञाकारी हैं और उनका रूप भयंकर है। उन्हें देखने में प्रलयाग्नि के समान और हजारों भुजाओं से युक्त दिखाई देते हैं। उनका श्यामवर्ण (गहरे नीले रंग का) होने के कारण वे मेघ की तरह प्रतीत होते हैं। उनके तीन जलते हुए बड़े-बड़े नेत्र और विकराल दाढ़ें हैं, जो सूर्य के तीन जलते हुए रूप को याद दिला सकते हैं। वीरभद्र का रूप शिव ने अपनी जटा के द्वारा प्रकट किया था, इसलिए उनकी जटाएं सीधे ज्वालामुखी के लावा के समान होती हैं, जो भयंकरता का प्रतीक है। उनके गले में नरमुंड माला होती है, जो अपराधों का प्रतीक है और वे सभी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र धारण करते हैं।

 माता सती की मृत्यु के बाद, वीरभद्र स्वामी भगवान शिव के जटाओं से प्रकट हुए। उन्हें पहले रुद्र अवतार के रूप में भी जाना जाता है।

हालांकि, वीरभद्र का रूप भयानक हो सकता है, लेकिन शिवस्वरूप होने के कारण वे परम कल्याणकारी हैं। उनका मुख समय-समय पर प्रसन्न हो जाता है और इसका मतलब यह है कि वीरभद्र शीघ्र ही प्रसन्न होने वाले हैं, जैसे भगवान शिव। वह भक्तों के लिए संरक्षक, विनाशकारी शक्ति के लिए अद्भुत एवं प्रभुत्व के प्रतीक हैं। भक्तो के जिज्ञासा हेतु यहाँ वीरभद्र गायत्री मंत्र ,वीरभद् के मूल मंत्र, बीज मंत्र  का संकलन किया गया हे। 

 

वीरभद्र गायत्री मंत्र Veerbhadra Gayatri Mantra

ॐ बिरनादाये विद्महे

अघोर रूपाय धीमहि

तन्नो बीरभद्रः प्रचोदयात्॥

 

 

 

वीरभद्र मूल मंत्र Veerbhadra Mool Mantra

 

ॐ ह्रौं हूं वं वीरभद्राय नमः॥

ॐ ह्रौं हुं वं वीरभद्राय नमः 

 

 

लाभ : वीरभद्र जी का मूल मंत्र प्रतिदिन जाप करने से जीवन के सभी कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है। यह मंत्र दुश्मनों को पराजित करने और समाज में सुधार करने में भी सहायता करता है।

वीरभद्र स्वामी के मूल मंत्र का जाप करने की विधि 

सूर्योदय के साथ या सूर्यास्त से पहले का समय जाप करने के लिए उत्तम होता है। आपको लाल रंग के वस्त्र धारण करना चाहिए और दक्षिण की ओर मुख करके आसन पर बैठना होगा।

  1. सुबह सूर्योदय के साथ या सूर्यास्त बाद करें।  
  2. बस्त्र  रंग – लाल काधारण करे। 
  3. दक्षिण दिशा के और बैठे 
  4. सबसे पहले गणेश जी को अर्घ्य दें।
  5. घी का दीपक जलाएं।
  6. मन में वीरभद्र स्वामी का मानसिक चित्र बनाएं।
  7. रुद्राक्ष माला के सहारे मंत्र का 108 बार जाप करें।
  8. जाप करने के बाद कुछ समय ध्यान में अवश्य बैठें।
  9. अगर संभव हो तो बकरी को चारा खिलाएं।

 

वीरभद्र का मंत्र। veerabhadra mantra in hindi

वीरभद्र मंत्र (पहला ) वीरभद्र शाबर मंत्र

ॐ हं ठ: ठ: ठ: सैं चां ठं ठ: ठ: ठ: ह्र: ह्रौं ह्रौं ह्रैं क्षैं क्षों क्षैं क्षं ह्रौं ह्रौं क्षैं ह्रीं स्मां ध्मां स्त्रीं सर्वेश्वरी हुं फट् स्वाहा

 

वीरभद्र तीव्र मंत्र । वीरभद्र शाबर मंत्र

ॐ ड्रं ह्रौं बं जूं बं हूं बं स: बीर वीरभद्राय प्रस्फुर प्रज्वल आवेशय जाग्रय विध्वंसय क्रुद्धगणाय हुं

 

बीरभद्र मंत्र पाठ के लाभ । Veerbhadra Mantra Benefits

  • यदि पशुओं या हिंसक जीवों के प्राणहानि का भय हो, तो मंत्र के सात बार जप से निवारण हो सकता है।
  • मंत्र को एक हजार बार बिना रुके लगातार जप करने से स्मरण शक्ति में अद्भुत चमत्कार देखा जा सकता है।
  • मंत्र का बिना रुके लगातार दस हजार बार जप करने से त्रिकालदृष्टि, अर्थात् भूत, वर्त्तमान और भविष्य के संकेत पढ़ने की शक्ति विकसित होती है।
  • मंत्र का बिना रुके लगातार लक्षजप, यानी एक लाख जप रुद्राक्ष माला से करने पर खेचरत्व और भूचरत्व की प्राप्ति होती है। इसके लिए लाल वस्त्र धारण करके, लाल आसन पर विराजमान होकर उत्तर दिशा की ओर मुख करना चाहिए।
  • इस साधना को हंसी-खेल नहीं समझना चाहिए। न ही इसे हंसी-ठहाके में प्रयास करना चाहिए। इसे आवश्यकता पड़ने पर और स्वयं या किसी अन्य के कल्याण के उद्देश्य से ही करना चाहिए। किसी को परेशान करने के उद्देश्य से करने पर उल्टा फल होगा।

 

श्री रक्ततारा तंत्रनाशक महामंत्र

महिलाओं के लिए यह वीरभद्र साधना पूर्णतः वर्जित है। महिलाएं निम्न रक्ततारा महामंत्र का प्रयोग कर सकती हैं।

 

श्री रक्ततारा तंत्रनाशक महामंत्र

रक्तवर्णकारिणी,मुण्ड मुकुटधारिणी, त्रिलोचने शिव प्रिये, भूतसंघ विहारिणी

भालचंद्रिके वामे, रक्त तारिणी परे, पर तंत्र-मंत्र नाशिनी, प्रेतोच्चाटन कारिणी

नमो कालाग्नि रूपिणी,ग्रह संताप हारिणि, अक्षोभ्य प्रिये तुरे, पञ्चकपाल धारिणी

नमो तारे नमो तारे, श्री रक्त तारे नमो।

ॐ स्त्रीं स्त्रीं स्त्रीं रं रं रं रं रं रं रं रं रक्तताराय हं हं हं हं हं घोरे-अघोरे 

वामे खं खं खं खं खं खर्परे सं सं सं सं सं सकल 

तन्त्राणि शोषय-शोषय सर सर सर सर सर भूतादि नाशय-नाशय स्त्रीं हुं फट।


 

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