कलयुग के श्लोक | Kalyug Quotes in Sanskrit

कलयुग के श्लोक

कलियुग धार्मिक परंपरा में एक युग है जो हिंदू धर्म में चार युगों में से चौथा और आधिकारिक रूप से सबसे अंतिम है। इस युग को कलियुग कहा जाता है क्योंकि इसमें कलियुग धर्म का प्रभाव होता है, जिसमें अन्याय, अधर्म, भ्रष्टाचार, असमानता, लोभ, मोह, और अहंकार की प्राधान्यता होती है। कलियुग का अवधि लगभग 4,32,000 वर्ष होता है, जिसका आधिकारिक आरंभ कलियुग सम्बन्धी धर्मग्रंथों के अनुसार द्वापर युग के अंतिम दिन, जिसे आदिकाल और प्रथमकलि भी कहा जाता है, से होता है।

इस लेख में, कलियुग के श्लोकों का संकलन किया गया है जो इस युग में धर्म, नैतिकता, और मानवता के अध्यात्मिक पतन की अवधि को दर्शाते हैं। ये श्लोक व्यक्ति के आदर्शों के पतन, अधर्म, और सामाजिक विघ्नों को बयान करते हैं, जिससे धर्मिकता और नैतिकता की गिरावट होती है।

श्लोक #1 कलयुग के श्लोक

धर्मो न शिष्यते राजा कामाचारो भविष्यति ।
रजो भविष्यति सर्वं स्त्रीषु दुर्बलता भवेत् ॥

अर्थ: धर्म का पालन नहीं होगा और राजा अपनी इच्छा से राज्य करेंगे।चारों तरफ अराजकता और भ्रष्टाचार होगा। स्त्रियाँ कमजोर और असुरक्षित होंगी।

श्लोक #2 कलयुग के श्लोक

अल्पायुष्याः क्षुधार्ताश्च रोगाः सर्वे भविष्यति ।
वृद्धाः कल्पान्तकालेषु जन्म प्राप्त्य भविष्यति ॥

अर्थ: लोगों का जीवनकाल कम होगा और वे भूख और बीमारियों से ग्रस्त होंगे। वृद्ध लोग बहुत कम होंगे और वे कल्प के अंत में जन्म लेंगे।

श्लोक #3 कलयुग श्लोक

दाम्पत्येऽभिरुचिर्हेतुः मायैव व्यावहारिके ।
स्त्रीत्वे पुंस्त्वे च हि रतिः विप्रत्वे सूत्रमेव हि ॥

अर्थ: विवाह का आधार केवल कामुकता होगा। स्त्री और पुरुष के बीच प्रेम केवल शारीरिक आकर्षण तक सीमित होगा।ब्राह्मण केवल जनेऊ पहनने से ब्राह्मण नहीं माने जाएंगे।

श्लोक #4 Kalyug Quotes

वृत्तं चापलमेव हि भविष्यति तपो दंभः ।


क्रोधो हि बलवान् नृणां मृत्युः सर्वेषु देशेषु ॥

अर्थ: चापलूसी ही जीवन जीने का तरीका होगा। तपस्या केवल दिखावा बनकर रह जाएगी। लोगों में क्रोध और हिंसा बढ़ेगी। हर जगह मृत्यु का तांडव होगा।

श्लोक #5 कलयुग के श्लोक

कलयुग के श्लोक - अनाढ्यतैव असाधुत्वे साधुत्वे दंभ एव तु । स्वीकार एव चोद्वाहे स्नानमेव
अनाढ्यतैव असाधुत्वे साधुत्वे दंभ एव तु ।
स्वीकार एव चोद्वाहे स्नानमेव प्रसाधनम् ॥

अर्थ: धनवान ही सच्चा माना जाएगा। साधुता केवल दिखावा बनकर रह जाएगी। विवाह केवल एक समझौता होगा।
स्नान ही शरीर और आत्मा को शुद्ध करने का एकमात्र तरीका होगा।



श्लोक #6 कलयुग के पांच सत्य

लिङ्‌गं एवाश्रमख्यातौ अन्योन्यापत्ति कारणम्।
अवृत्त्या न्यायदौर्बल्यं पाण्डित्ये चापलं वचः॥

अर्थ: कलियुग में, लोगों के बीच की झगड़े केवल उनके लिंग और आश्रम के आधार पर होंगी। न्याय की कमजोरी और बदला-बदली की बोली को ही ज्ञान माना जाएगा।

श्लोक #7 Kalyug Quotes in Sanskrit

वित्तमेव कलौ नॄणां जन्माचारगुणोदयः।
धर्मन्याय व्यवस्थायां कारणं बलमेव हि॥

अर्थ: कलियुग में, धन ही व्यक्ति के उत्तम जन्म, आचरण और गुणों का सूचक होगा। और न्याय और व्यवस्था का केवल बल ही कारण होगा।

श्लोक #8 कलयुग के श्लोक

दाम्पत्येऽभिरुचिर्हेतुः मायैव व्यावहारिके।
स्त्रीत्वे पुंस्त्वे च हि रतिः विप्रत्वे सूत्रमेव हि॥

अर्थ:  कलियुग में, पुरुष और स्त्री के बीच की आकर्षण धर्म, धन, और व्यवहार के आधार पर होगा। स्त्री का और पुरुष का मेल केवल व्यावसायिक होगा, और ब्राह्मण का मेल केवल धागे के आधार पर होगा।

श्लोक #9 कलयुग के श्लोक

कलयुग के श्लोक -ततश्चानुदिनं धर्मः सत्यं शौचं क्षमा दया। कालेन बलिना राजन्
ततश्चानुदिनं धर्मः सत्यं शौचं क्षमा दया।
कालेन बलिना राजन् नङ्‌क्ष्यत्यायुर्बलं स्मृतिः॥

अर्थ: इसके पश्चात, क्रमशः, कलियुग में 1) धर्म, 2) सत्य, 3) शुचिता, 4) क्षमा और 5) दया धीरे-धीरे कम होंगे। हे राजन्, समय के साथ, जीवनकाल, शक्ति और स्मृति भी कम होते जाएगे।

श्लोक #10 कलियुग के श्लोक

क्षुत्तृड्भ्यां व्याधिभिश्चैव संतप्स्यन्ते च चिन्तया।
त्रिंशद्विंशति वर्षाणि परमायुः कलौ नृणाम्॥

अर्थ:  कलियुग में, लोग भूख, प्यास, और विभिन्न रोगों के कारण पीड़ित होंगे। चिंता से उन्हें पीड़ा होगी, और उनकी आयु बीस-तीस वर्ष ही रह जाएगी।

श्लोक #11 Kalyug Quotes in Sanskrit

दूरे वार्ययनं तीर्थं लावण्यं केशधारणम्।
उदरंभरता स्वार्थः सत्यत्वे धार्ष्ट्यमेव हि॥

अर्थ: कलियुग में, लोग सागरों और तीर्थस्थलों के दूर यात्रा करेंगे, अपनी बालों को लंबा बनाएंगे, लेकिन सत्यता में अत्यधिक अहंकार दिखाएंगे।

श्लोक #12 कलयुग के श्लोक

अनावृष्ट्या विनङ्‌क्ष्यन्ति दुर्भिक्षकरपीडिताः।
शीतवातातपप्रावृड् हिमैरन्योन्यतः प्रजाः॥


अर्थ: कलियुग में, लोग अवसाद, अत्यधिक ठंड, गरमी, तेज हवाओं, बारिश, और आपसी विवादों के कारण पीड़ित होंगे।

श्लोक #13 कलयुग की भविष्यवाणी

दाक्ष्यं कुटुंबभरणं यशोऽर्थे धर्मसेवनम्।
एवं प्रजाभिर्दुष्टाभिः आकीर्णे क्षितिमण्डले॥

अर्थ: कलियुग में, बोलचाल कौशल्य, परिवार का सहारा, प्रसिद्धि, और अपने ही लाभ की सेवा को धर्म माना जाएगा। इस प्रकार, दुष्ट लोगों से भरे हुए पृथ्वी होगी।

श्लोक #14 कलियुग के श्लोक

आच्छिन्नदारद्रविणा यास्यन्ति गिरिकाननम्।
शाकमूलामिषक्षौद्र फलपुष्पाष्टिभोजनाः॥

अर्थ: करों की अत्यधिक और अकालिक कर के कारण, लोग अपने घरों को छोड़कर पहाड़ों और वनों में रहेंगे। वे पत्तों, जड़ों, मांस, मधु, फल, और फूल खाएंगे।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये श्लोक कलियुग के नकारात्मक पहलुओं का वर्णन करते हैं।

कलियुग में सकारात्मक पहलू भी हैं, जैसे:

  • भगवान का नाम जपने से मुक्ति प्राप्ति होगी।
  • भगवान की भक्ति कलियुग में सबसे आसान मार्ग है।
  • कलियुग में भगवान की कृपा प्राप्त करना आसान है।
  • यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये श्लोक केवल भविष्यवाणियां हैं।

यह जरूरी नहीं है कि कलियुग में सभी लोगों के सा


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