Best 30 Bhagwat Geeta Sanskrit Shlok । 30 प्रसिद्ध भगवद्गीता के श्लोक हिंदी में

भगवद गीता, भारतीय साहित्य की महत्वपूर्ण पुराणों में से एक है और यह महाभारत के भीष्म पर्व के अंतर्गत आता है। यह ग्रंथ भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच हुए संवाद के रूप में प्रस्तुत है और यह भारतीय दर्शन, धर्म, और मानवता के मूल्यों को समझाने वाली अद्वितीय ग्रंथों में से एक है। भगवद गीता के श्लोक हमें जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझने में मदद करते हैं और सही मार्ग पर चलने के उपाय बताते हैं। यहाँ कुछ ऐसे श्रेष्ठ 30 Bhagwat Geeta Sanskrit Shlok हैं, जिनका हिंदी अनुवाद सहित प्रस्तुत है:

Best 30 Bhagwat Geeta Sanskrit Shlok in Hindi 

 

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।

अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥ 1

(चतुर्थ अध्याय, श्लोक 7)

 

हिंदी अनुवाद: हे भारत! जब-जब धर्म का पतन होता है, अधर्म का उद्भव होता है, तब-तब मैं अवतार लेकर आता हूं

 

This verse is from Chapter 4, Verse 7 of the Bhagavad Gita, which is a sacred Hindu scripture. It is spoken by Lord Krishna to Arjuna during the discourse on the battlefield of Kurukshetra. 

 

English Translation: Whenever there is a decline in righteousness and an increase in unrighteousness, at that time I manifest myself on Earth.”

 

 

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन । 

मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि ॥ 2

(द्वितीय अध्याय, श्लोक 47)

 

हिंदी अनुवाद: कर्म ही तेरा अधिकार है, फल की इच्छा मत कर। फल की आशा में कर्म मत कर, कर्म में ही लगा रह)

 

English Translation: This verse is from Chapter 2, Verse 47 of the Bhagavad Gita.

 

“You have a right to perform your prescribed duties, but you are not entitled to the fruits of your actions. Never consider yourself to be the cause of the results of your activities, and never be attached to not doing your duty.”

 

 

उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत् । 

आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः ॥ 3

(षष्ठ अध्याय, श्लोक 5)

 

हिंदी अनुवाद: अपने आपको अपने ही प्रयासों से ऊपर उठाओ, खुद को नीचे न गिरने दो। मनुष्य का अपना आत्मा ही उसका मित्र है और अपना आत्मा ही उसका शत्रु)

 

This verse is from Chapter 6, Verse 5 of the Bhagavad Gita.

 

English Translation: “Lift yourself by yourself; do not let yourself degrade. For the self is the friend of oneself, and the self is the enemy of oneself.”

 

 

ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।

सङ्गात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥ 4

(द्वितीय अध्याय, श्लोक 62)

 

हिंदी अनुवाद: “व्यक्ति जो विषयों पर ध्यान करता है, उसका उन विषयों में आसक्ति उत्पन्न होता है। आसक्ति से काम उत्पन्न होता है और काम से क्रोध उत्पन्न होता है॥”

 

This verse is from Chapter 2, Verse 62 of the Bhagavad Gita.

 

English Translation: “While contemplating the objects of the senses, a person develops attachment for them; from attachment, desire is born; from desire, anger arises.”

 

 

यदा संहरते चायं कुर्मो रात्रिस्तथा । 

तदा तत्त्वमसि पश्यन् कालो न पश्यते मुने ॥ 4

(अष्टम अध्याय, श्लोक 20)

 

हिंदी अनुवाद: हे मुनिवर! जब दिन कार्य पूरा होकर रात आती है, उस समय तत्त्वदर्शी ज्ञानी पुरुष परमात्मा को ही देखता है, उसे काल दिखाई नहीं देता 

 

English Translation:  “When this tortoise withdraws its limbs on all sides, like during the night, O sage, then the wise person realizes that the self (Tat Tvam Asi) and the concept of time (Kala) do not affect it.”

 

 

मनुष्याणां सहस्रेषु कश्चिद्यतति सिद्धये । 

यततामपि सिद्धानां कश्चिन्मां वेत्ति तत्त्वतः ॥ 5

 

 

हिंदी अनुवाद: हजारों मनुष्यों में कोई एक भी सफलता के लिए प्रयत्न करता है, और जो सफल हो गए हैं उनमें भी कोई एक मुझे वास्तव में जान पाता है 

The verse you provided is from Chapter 7, Verse 3 of the Bhagavad Gita. 

 

English Translation: “Among thousands of men, one perhaps strives for perfection; and even among those successful strivers, one, perhaps, knows Me truly in essence.”

 

 

अशाश्वतं खलु धर्मराज्यं तद्भ्रातृभागो युधि कुरुनेत्राणि गच्छन्ति मम ।

 ईशुभिश्च परावरे षु राज्यं संजय हे कुरुनन्दन ॥ 6

 

 

हिंदी अनुवाद: धर्मराज्य तो अशाश्वत है, इसमें भाइयों को ललकारना व्यर्थ है। हे कुरुनंदन! तुम तो मेरी आँखों के समान हो, इसलिए शीश झुकाकर भगवान कृष्ण की शरण में जाओ

 

The verse you provided is from Chapter 2, Verse 6 of the Bhagavad Gita. 

 

English Translation:  “Surely, the kingdom of those who are controlled by desire is as unstable as a night’s dream. O son of the Kuru dynasty, they have no stability in their kingdom, nor even in the sphere of thought and action.”

 

 

यद्यद्विभूतिमत्सत्त्वं श्रीमदूर्जितमेव वा ।

 तत्तदेवावगच्छ त्वं मम तेजोंशसम्भवम् ॥ 7

(अध्याय 10, श्लोक 41)

 

हिंदी अनुवाद: जो कुछ भी अस्तित्व में है चाहे वह श्रीमती हो या विजयी पराक्रमी, वह सब मेरे तेज से उत्पन्न हुआ है, अतः तुम मेरी शरण में आओ

 

The verse you provided is from Chapter 10, Verse 41 of the Bhagavad Gita. 

 

English Translation: “Know whatever has the nature of brilliance, beauty, and power, exists as a fragment of My divine splendor.”

 

 

मयि सर्वमिदं प्रोतं सूत्रे मणिगणा इव । 

मामेकं शरणं व्रज विश्वात्मन्मा शुचः स्थिरम् ॥ 8

(अध्याय 7, श्लोक 7 )

 

हिंदी अनुवाद: इस संसार की सारी वस्तुएँ मणियों की माला में पिरोए हुए मोतियों की तरह मुझमें पिरोई हुई हैं। अतः हे विश्वात्मन्! मेरी शरण में आओ, मुझमें ही तुम्हारा कल्याण है

 

 

The verse you provided is from Chapter 7, Verse 7 of the Bhagavad Gita

English Translation: “Behold this entire universe, fixed like an ornament in the sky, through My Yogic power; I am the nourishing source of all, I am the Supreme.”

 

 

मामुपेत्य पुनर्जन्म दुःखालयमशाश्वतम् । 

नाप्नुवन्ति महात्मानः संसिद्धिम् परमां गताः ॥ 9

 (अध्याय 8, श्लोक 15)

हिंदी अनुवाद: जो महात्मा मुझे प्राप्त हो गए हैं, वे दुःखों के भंडार इस अशाश्वत संसार में फिर कभी जन्म नहीं लेते

The verse you provided is from Chapter 8, Verse 15 of the Bhagavad Gita.

 

English Translation: “Attaining Me, those who reach the great souls, never incur rebirth in this transient world, which is the abode of misery, because they have attained the highest perfection.”

 

 

मां च यो व्यवसायो युक्त आसीत स एव स उक्तवान् ।

स सुकृती च स युक्तश्चेति त्रिविधः नारः स उच्यते ॥  10

(अध्याय 7, श्लोक 17)

 

 

हिंदी अनुवाद: जो मुझमें लगा हुआ है, जो मुझे खोजता है, जो मेरी उपासना करता है, ऐसे तीन प्रकार के भक्त मुझे प्रिय हैं

The verse you provided is from Chapter 7, Verse 17 of the Bhagavad Gita. 

 

English Translation: “He who is endowed with devotion to Me, who is ever steadfast and worships Me with unwavering faith, such a person is declared by Me to be truly wise, and of unwavering devotion.”

 

In this verse, Lord Krishna describes the three types of devotees who have strong and unwavering connection with the Divine:

 

Those who approach the Divine seeking desires.

Those who seek knowledge and understanding of the Divine.

Those who have unwavering devotion and a deep sense of connection.

 

 

30 प्रसिद्ध भगवद्गीता के श्लोक हिंदी में Bhagwat Geeta Sanskrit Shlok

 

नैनं छिद्रन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावक: ।

न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुत ॥

(द्वितीय अध्याय, श्लोक 23)

 

हिंदी अनुवाद:”शस्त्र इस आत्मा को नहीं काट सकते, आग इसे नहीं जला सकती, पानी इसे नहीं भिगो सकता, और हवा इसे नहीं सुखा सकती।”

 

This verse is from Chapter 2, Verse 23 of the Bhagavad Gita. I 

 

English Translation: “Weapons do not cut this soul, fire does not burn it, water does not make it wet, and wind does not dry it.”

 

 

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् । 

धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥  12

 

हिंदी अनुवाद: सज्जनों का उद्धार करने और दुष्कर्मियों का विनाश करने के लिए मैं युग-युगान्तर में अवतरित होता हूं।

 

The verse you provided is from Chapter 4, Verse 8 of the Bhagavad Gita.

 

English Translation: “To protect the righteous, to annihilate the wicked, and to reestablish the principles of dharma (righteousness), I manifest myself in every age.”

 

 

वेदाहमेकं शार्दूलविक्रिडितं धर्मजिञा सुसंहितम्। 

अथो मे भगवानुवाच मूलशास्त्रम्॥  13

 

हिंदी अनुवाद: मैंने वेद का सार एक ग्रंथ में संकलित कर तुम्हें दिया है जिसे धर्मशास्त्र कहते हैं। वही मूल शास्त्र है।

 

The verse you provided is from the Udyoga Parva of the Mahabharata, specifically from the conversation between Duryodhana and Krishna. 

 

English Translation: “I am well versed in the Vedas, O tiger among men, and perfectly know their meaning. All the Dharma that is in me, fully established in the scriptures, tell me then, what is the root one?”

 

 

मया ततमिदं सर्वं जगदव्यक्तमूर्तिना ।

मत्स्थानि सर्वभूतानि न चाहं तेष्ववस्थितः ॥  14

 

हिंदी अनुवाद: इस सारे विश्व को मैंने अपने एक अव्यक्त रूप में फैला रखा है, समस्त प्राणी मुझमें स्थित हैं, परंतु मैं उनमें नहीं हूं।

 

This verse is from the Bhagavad Gita, Chapter 9, Verse 4. Here’s the English translation:

 

English Translation: “By Me, in My unmanifested form, this entire universe is pervaded. All beings exist in Me, but I am not contained in them.”

 

 

ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति। 

भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि मायया।  15

 

हिंदी अनुवाद: हे अर्जुन! ईश्वर सभी प्राणियों के हृदय में विराजमान है। माया के यंत्र के द्वारा सभी प्राणियों को भ्रमित किए हुए है।

The verse you provided is from the Bhagavad Gita, Chapter 18, Verse 61. 

 

English Translation: “The Supreme Lord dwells in the hearts of all creatures, O Arjuna. Revolving them through His illusive power, He causes them to move, as if they were mounted on a machine.”

 

श्रेष्ठ भगवद्गीता के श्लोक Bhagwat Geeta Sanskrit Shlok

मनुष्याणां सहस्रेषु कश्चिद्यतति सिद्धये । 

यततामपि सिद्धानां कश्चिन्मां वेत्ति तत्त्वतः॥  16

 

हिंदी अनुवाद: हजारों में कोई एक मनुष्य सफलता के लिए प्रयत्न करता है, और जो सफल हो जाते हैं, उनमें से भी कोई एक मुझे वास्तव में जान पाता है।

 

The verse you provided is from the Bhagavad Gita, Chapter 7, Verse 3. 

 

English Translation: “Out of many thousands among men, one may endeavor for perfection, and of those who have achieved perfection, hardly one knows Me in truth.”

 

 

तेषां सततयुक्तानां भजतां प्रीतिपूर्वकम्। 

ददामि बुद्धियोगं तं येन मामुपयान्ति ते॥  17

 

हिंदी अनुवाद: जो सदा मेरी भक्ति में लीन प्रेमपूर्वक मुझे भजते हैं, उन्हें मैं ऐसा बुद्धियोग देता हूँ जिससे वे मुझ तक पहुँच जाते हैं।

The verse you provided is from the Bhagavad Gita, Chapter 10, Verse 10. 

 

English Translation: “To those who are constantly devoted and who worship Me with love, I give the yoga of discernment by which they come to Me.”

 

 

अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते। 

तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥  18

 

हिंदी अनुवाद: जो लोग मुझे ही सदा ध्याते रहते हैं और मुझमें ही लीन रहते हैं, उन सदायोगरत भक्तों की मैं स्वयं रक्षा करता हूँ।

 

The verse you provided is from the Bhagavad Gita, Chapter 9, Verse 22. 

 

English Translation: “To those who are constantly devoted and who worship Me with love, I give the yoga of discernment by which they come to Me.”

 

 

तेषामहं समुद्धर्ता मृत्युसंसारसागरात्। 

भवामि नचिरात्पार्थ मय्यावेशितचेतसाम्॥  19

 

हिंदी अनुवाद: जिनका चित्त मुझमें लगा हुआ है, मैं उन्हें शीघ्र ही जन्म-मरण के भयानक संसार-सागर से पार करा देता हूँ।

 

The verse you provided is from the Bhagavad Gita, Chapter 12, Verse 7.

 

English Translation: “I am the deliverer from the mortal ocean of samsara for those whose minds are set on Me. O Partha (Arjuna), they quickly come to be absorbed in Me.”

 

 

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। 

अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥ 20

 

हिंदी अनुवाद: सभी धर्मों को त्यागकर केवल मेरी ही शरण में आओ, मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त करके मोक्ष दिलाऊँगा, शंका मत करो।

 

The verse you provided is from the Bhagavad Gita, Chapter 18, Verse 66. 

 

English Translation: “Abandon all varieties of dharma and simply surrender unto Me alone. I shall liberate you from all sinful reactions; do not fear.”

 

 

भक्त्या त्वनन्यया शक्य अहमेवंविधोऽर्जुन ।

ज्ञातुं द्रष्टुं च तत्त्वेन प्रवेष्टुं च परंतप ॥  21

 

हिंदी अनुवाद: हे अर्जुन! अनन्य भक्ति से ही मुझे जाना, देखा और प्राप्त किया जा सकता है, यही मेरा स्वरूप है।

 

The verse you provided is from the Bhagavad Gita, Chapter 11, Verse 54.

 

English Translation: “By unswerving devotion, Arjuna, it is possible to know Me, to see Me, and to enter into Me. Those who follow this path are truly capable of knowing and realizing Me.”

 

 

मामुपेत्य पुनर्जन्म दुःखालयमशाश्वतम्।

 नाप्नुवन्ति महात्मानः संसिद्धिं परमां गताः॥ 22

 

हिंदी अनुवाद: मुझे प्राप्त हुए महात्मा इस दुःखों के भण्डार अशाश्वत संसार में फिर कभी जन्म नहीं लेते।

 

The verse you provided is from the Bhagavad Gita, Chapter 8, Verse 15. 

 

English Translation: “Attaining Me, those who reach the great souls, never incur rebirth in this transient world, which is the abode of misery, because they have attained the highest perfection.”

 

 

या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी।

यस्यां जाग्रति भूतानि सा निशा पश्यतो मुनेः॥  23

 

हिंदी अनुवाद: जिस समय सभी प्राणी सोए रहते हैं, उस समय जाग्रत योगी जागता है, और जब सब जागते हैं, तब मुनि सोया हुआ दिखता है।

The verse you provided is from the Bhagavad Gita, Chapter 2, Verse 69. 

 

English Translation: “What is night for all beings is the time of awakening for the self-controlled; and the time of awakening for all beings is night for the introspective sage.”

 

 

अहं सर्वस्य प्रभवो मत्तः सर्वं प्रवर्तते। 

इति मत्वा भजन्ते मां बुधा भावसमन्विताः॥  24

 

हिंदी अनुवाद: मैं सबका प्रभव हूँ, मुझसे ही सब उत्पन्न होता है, इस भाव से ज्ञानी भक्त मुझे भजते हैं।

 

The verse you provided is from the Bhagavad Gita, Chapter 10, Verse 8.

 

English Translation: “I am the source of all; from Me everything evolves. Knowing this, the wise worship Me with great devotion.”

 

 

मया ततमिदं सर्वं जगदव्यक्तमूर्तिना। 

मत्स्थानि सर्वभूतानि न चाहं तेष्ववस्थितः॥ 25

 

हिंदी अनुवाद: इस सारे जगत को मैंने अपने एक अव्यक्त रूप में व्याप्त कर रखा है, सभी प्राणी मुझमें ही स्थित हैं, परंतु मैं उनमें स्थित नहीं हूँ।

 

 

The verse you provided is from the Bhagavad Gita, Chapter 9, Verse 4. 

 

English Translation: “By Me, in My unmanifested form, this entire universe is pervaded. All beings exist in Me, but I am not contained in them.”

 

 

मनुष्याणां सहस्रेषु कश्चिद्यतति सिद्धये। 

यततामपि सिद्धानां कश्चिन्मां वेत्ति तत्त्वतः॥ 26

 

हिंदी अनुवाद: हजारों में कोई एक मनुष्य सिद्धि के लिए प्रयत्न करता है, और सिद्ध पुरुषों में भी कोई एक मुझे वास्तव में जान पाता है।

 

The verse you provided is from the Bhagavad Gita, Chapter 7, Verse 3. 

 

English Translation: “Out of many thousands among men, one may endeavor for perfection, and of those who have achieved perfection, hardly one knows Me in truth.”

 

त्रिविधा भवति श्रद्धा देहिनां सा स्वभावजा। 

सात्त्विकी राजसी चैव तामसी चेति तां शृणु॥ 27

 

हिंदी अनुवाद: मनुष्यों की श्रद्धा तीन प्रकार की होती है – सात्विक, राजस और तामस, अब उनके स्वरूप के विषय में सुनो।

 

The verse you provided is from the Bhagavad Gita, Chapter 17, Verse 2. 

 

English Translation: “Threefold is the faith of the embodied, which is innate to their nature—sattvic (mode of goodness), rajasic (mode of passion), and tamasic (mode of ignorance). Hear about this.”

 

 

द्वाविमौ पुरुषौ लोके क्षरश्चाक्षर एव च। 

क्षरः सर्वाणि भूतानि कूटस्थोऽक्षर उच्यते॥  28

 

हिंदी अनुवाद: इस लोक में दो पुरुष हैं – क्षर और अक्षर। सभी भूत अस्थायी हैं, केवल परमात्मा ही नित्य और अविनाशी है।

 

The verse you provided is from the Bhagavad Gita, Chapter 15, Verse 16. 

 

English Translation: “There are two classes of beings in this world, the perishable and the imperishable; the perishable are all those living entities, and the imperishable is the self alone.”

 

 

ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति। 

भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि मायया॥ 29

 

हिंदी अनुवाद: हे अर्जुन! ईश्वर सभी प्राणियों के हृदय में विराजमान है। माया के यंत्र के द्वारा सभी प्राणियों को भ्रमित    किया हुआ है।)

 

The verse you provided is from Chapter 18, Verse 61 of the Bhagavad Gita. It’s the last verse of the Bhagavad Gita, where Lord Krishna imparts his final teachings to Arjuna. 

 

English Translation: “The Lord resides in the hearts of all beings, O Arjuna, causing all beings to act, as if they were mounted on a machine, by His illusion.”

 

 

मां च यो व्यवसायो युक्त आसीत स एव स उक्तवान्। 

स सुकृती च स युक्तश्चेति त्रिविधः नारः स उच्यते॥  30

 

हिंदी अनुवाद: जो मुझमें लगा हुआ है, जो मुझे खोजता है, जो मेरी उपासना करता है, ऐसे तीन प्रकार के भक्त मुझे प्रिय हैं।)

 

        The verse you provided is from Chapter 7, Verse 28 of the Bhagavad Gita. 

English Translation: “He who is endowed with devotion to Me and with faith, who is established in Me and has Me as his supreme goal, is the best of My devotees. Thus, according to Me, he is My own self. He is indeed dear to Me. All those who are thus, ever harmonious, I regard as the most perfect in yoga.”

 


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