Krimi Samhara Suktam : कृमि संहार सूक्तम के जाप, लाभ , महत्व

आज की तेजी से भरी दुनिया में, हमें नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षित रहने और अच्छी सेहत बनाए रखने के लिए तरीके ढूंढ़ने का महत्व है। प्राचीन शास्त्रों और वैदिक पाठों में विभिन्न रीति-रिवाजों और मंत्रों का वर्णन है जिनका मान्यतापूर्ण प्रभाव हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। इनमें से एक शक्तिशाली मंत्र है “कृमि संहार सूक्तम”।

हिन्दू धर्म में, वेद सबसे पुराने और पवित्र पाठों के रूप में मान्यता प्राप्त करते हैं, जो आध्यात्मिकता, धार्मिक आचरण, और मंत्रों पर विस्तारित ज्ञान की खजानी हैं। “कृमि संहार सूक्तम” एक वैदिक स्तुति है जो भगवान विष्णु को समर्पित है, जो हिन्दू पौराणिक में संरक्षक और रक्षक के रूप में पूजे जाते हैं। इस मंत्र का जाप करने की क्षमता से कृमि (परजीवी), स्वामिक और अध्यात्मिक रूपों में अपक्रामकों को नष्ट करने की शक्ति होती है।

कृमि संहार सूक्तम (यजुर्वेदीय )। Krimi Samhara Suktam (Yajurveda) Lyrics

(कृ|य|तै|आ|४|३६|१)

 

अत्रिणा त्वा क्रिमे हन्मि।

कण्वेन जमदग्निना।

विश्वावसोर्ब्रह्मणा हतः।

क्रिमीणाग्ं राजा।

अप्येषाग् स्थपतिर्हतः।

अथो माता’थो पिता।

अथो स्थूरा अथो क्षुद्राः।

अथो कृष्णा अथो श्वेताः।

अथो आशातिका हताः।

श्वेताभिस्सह सर्वे हताः || ३६

 

आहरावद्य।

शृतस्य हविषो यथा।

तत्सत्यम्।

यदमुं यमस्य जम्भयोः।

आधामि तथा हि तत्।

खण्फण्म्रसि ||

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ||

 

 

 

 

क्रिमि संहार सूक्तम् (अथर्ववेदीय) Krimi Samhara Suktam (Atharva Veda)

 

कृमि संहार सूक्तम् (अथर्ववेदीय) – कृमिजम्भनम् (३१)

 

[१-५ सविता। पशवः। त्रिष्टुप्, ३ उपरिष्टाद्विराड्बृहती, ४ भुरिगनुष्टुप्]

 

इन्द्रस्य या मही दृषत् क्रिमेर्विश्वस्य तर्हणी।

तया पिनष्मि सं क्रिमीन् दृषदा खल्वा इव॥ १

 

दृष्टमदृष्टमतृहमथो कुरूरुमतृहम्।

अल्गण्डून्स्थर्वान् छलुनान् क्रिमीन् वचसा जम्भयामसि॥ २

 

अल्गण्डून् हन्मि महता वधेन दूना अदूना अरसा अभूवन्।

शिष्टानशिष्टान् नि तिरामि वाचा यथा क्रिमीणां नकिरुच्छिषातै॥ ३

 

अन्वान्त्र्यं शीर्षण्य॑१॒ मथो॒ पार्ष्टेयं॒ क्रिमीन्।

अवस्कवं व्यध्वरं क्रिमीन् वचसा जम्भयामसि॥ ४

 

ये क्रिमयः पर्वतेषु॒ वनेष्वोषधीषु पशुष्वप्स्व॑१॒न्तः।

ये अस्माकं तन्वमाविविशु सर्वं तद्धन्मि जनिम क्रिमीणाम्॥ ५

 

 

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कृमि संहार सूक्तम क्या है?

“कृमि संहार सूक्तम” संस्कृत श्लोकों का समूह है जो कृमि (परजीवी) और नकारात्मकताओं को नष्ट करने के लिए भगवान विष्णु के आशीर्वाद का आह्वान करते हैं। शब्द “कृमि” परजीवी को दर्शाता है, और “संहार” नष्टि का अर्थ होता है। इसलिए, “कृमि संहार सूक्तम” का अनुवाद लगभग “परजीवी के नष्टि के लिए स्तोत्र” हो सकता है।

महत्व

सूक्तम का महत्व परजीवी और अध्यात्मिक रूपों में नकारात्मक प्रभावों से लड़ने की क्षमता में होता है। परजीवी रूप में, ये कीटाणु, बैक्टीरिया, और वायरस जैसे शारीरिक परजीवीय हो सकते हैं। यह मंत्र व्यक्ति को भगवान विष्णु के द्वारा इन परजीवीयों को हटाने और जीवन में समरसता को पुनः स्थापित करने के लिए प्रेरित करता है।

 

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कृमि संहार सूक्तम के लाभ

 

कृमि संहार सूक्तम के लाभ । Krimi Samhara Suktam Benefits

नियमित रूप से कृमि संहार सूक्तम का जाप करने से कई लाभ हो सकते हैं। कुछ प्रमुख लाभों में से कुछ निम्नलिखित हैं:

परजीवीयों से सुरक्षा: यह सूक्तम का जाप करने से व्यक्ति को शारीरिक परजीवीयों जैसे कीटाणु, कीटाणु, बैक्टीरिया, और वायरस से सुरक्षा मिलती है। इसके अलावा, इसे नकारात्मक ऊर्जा और प्रभावों से भी बचाता है जो व्यक्ति की प्राणिकता को क्षीण कर सकते हैं और उसके संतुलन को बिगाड़ सकते हैं।

संकटों का पार करना: यह सूक्तम का जाप करके, व्यक्ति अपने जीवन में आने वाली संकटों को पार कर सकता है। यह मंत्र व्यक्ति की राह में आने वाली बाधाओं को दूर करने और जीवन में सामरिकता लाने की शक्ति देता है।

बीमारी और असमय मृत्यु से बचें: कृमि संहार सूक्तम के जाप से बुखार और अन्य बीमारियों का इलाज हो सकता है। यह आपके शरीर को ऊर्जा प्रदान करके स्वास्थ्य को सुधारता है। इसके साथ ही, यह असमय मृत्यु से बचने में मदद कर सकता है।

स्वास्थ्य और तंदरुस्ती के लिए: यह सूक्तम का जाप करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है। यह मंत्र व्यक्ति के शरीर में ऊर्जा को संतुलित करता है, मन को शांत करता है, और उसे स्वस्थ और तंदरुस्त बनाए रखने में मदद करता है।

नकारात्मक शक्तियों के भय से मुक्ति प्राप्त करें: यह सूक्तम के जाप से आप नकारात्मक शक्तियों या नकारात्मक प्रभावों के भय से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। यह आपको शक्तिशाली और सुरक्षित महसूस कराता है।

कर्मिक समस्याओं से राहत प्राप्त करें: यह सूक्तम के जाप से आप कर्मिक समस्याओं से राहत प्राप्त कर सकते हैं। यह आपकी कर्मिक बंधनों को तोड़कर आपको मुक्ति की ओर ले जाता है। इससे आपकी जीवन में सुख, समृद्धि, और समानता की प्राप्ति हो सकती है।

स्वास्थ्य और तंदरुस्ती के लिए: सूक्तम का जाप करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है। यह मंत्र व्यक्ति के शरीर में ऊर्जा को संतुलित करता है, मन को शांत करता है, और उसे स्वस्थ और तंदरुस्त बनाए रखने में मदद करता है।

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जाप करने के तरीके

समर्पण और ध्यान: शुरू करने से पहले, आपको ध्यान में भगवान विष्णु को समर्पित करना चाहिए। ध्यान करते समय विष्णु भगवान की मूर्ति या उनके ध्यान का चित्र देखें और उनकी कृपा और आशीर्वाद की कामना करें।

मंत्र का जाप: कृमि संहार सूक्तम का जाप करने के लिए आपको सबसे पहले उच्चारण के लिए एक शांत और पवित्र स्थान चुनना चाहिए। फिर आप बैठ जाएं और मन से शांत हों। ध्यान करें और मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” को अपने मन में उच्चारित करें। इसे नियमित रूप से कुछ मिनटों तक जापते रहें।

संगीत का उपयोग: कृमि संहार सूक्तम के जाप के दौरान, आप संगीत का उपयोग कर सकते हैं। भजन या कृष्ण लीला की गीतों को सुनना, व्यक्ति के मन को शांत करने और उसे ध्यान में लगाने में मदद करेगा।

नियमितता: कृमि संहार सूक्तम का जाप नियमित रूप से करना बहुत महत्वपूर्ण है। आपको प्रतिदिन इसे कम से कम एक बार अवश्य करना चाहिए ताकि इसके लाभ प्राप्त हो सकें।

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