Brihaspati Bhagwan Ki Aarti । बृहस्पति भगवान की आरती (Pdf)

Brihaspati Bhagwan Ki Aarti : बृहस्पति भगवान की आरती एक प्रमुख आरती है जो हिन्दू धर्म में बृहस्पति ग्रह की पूजा और आराधना के लिए समर्पित है। बृहस्पति भगवान ज्योतिष शास्त्र में गुरु ग्रह के रूप में प्रसिद्ध हैं, जो ज्ञान, विवेक, और बुद्धि का प्रतीक हैं। इस आरती के माध्यम से हम उनकी कृपा, शक्ति, और आशीर्वाद का स्तुति करते हैं और उनके प्रति अपना समर्पण प्रकट करते हैं, जो हमें जीवन में शांति, समृद्धि, और उत्तम संघर्ष की प्राप्ति के लिए प्रेरित करते हैं।

Brihaspati Bhagwan Ki Aarti । बृहस्पति भगवान की आरती

ॐ जय बृहस्पति देवा

ॐ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा।
छिन-छिन भोग लगाऊं, कदली फल मेवा।।
ॐ जय बृहस्पति देवा।।

तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अंतर्यामी।
जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी।।
ॐ जय बृहस्पति देवा।।

चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता।
सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता।।
ॐ जय बृहस्पति देवा।।

तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े।
प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्वार खड़े।।
ॐ जय बृहस्पति देवा।।

दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी।
पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी।।
ॐ जय बृहस्पति देवा।।

सकल मनोरथ दायक, सब संशय तारो।
विषय विकार मिटाओ, संतन सुखकारी।।
ॐ जय बृहस्पति देवा।।

जो कोई आरती तेरी प्रेम सहित गावे।
जेष्टानंद बंद सो-सो निश्चय पावे।।
ॐ जय बृहस्पति देवा।।

Brihaspati Bhagwan Ki Aarti । बृहस्पति भगवान की आरती

बृहस्पति देव की आरती PDF

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