सिंगारु महर्षि लंकाधीश, असुरपति रावणासुर को मारने के बाद भगवान श्रीरामचंद्रमूर्ति लंका से अयोध्या वापिस लौटकर आये। वशिष्ठ महर्षि ने श्रीराम को सुझाब दिया कि ये किसी व्यक्ति को ....
भक्तों के लिए सेवा हयन चुडि नामक एक गाँव में मारन नामक एक शिव भक्त रहा करता था। भगवान शिव के वे अनन्य भक्त थे। उसके पास जितने भी ....
सर्वोत्तम दान कमलम्मा नामक एक विधवा स्त्री, नागपुरा नामक एक गाँव में रहा करती थी। उसको एक पुत्री थी कन्नम्मा । एक बार नागपुरा में अकाल पड़ा था। गाँव ....
कश्मीरी दुशाला एकदा समय में, विजयनगर राज्य में चोक्कलिंगम् शासन चला रहे थे। एक दिन वे अपने मंत्रियों के साथ गणेश एवं पार्वती देवी की पूजा पूरा करके राजमंदिर ....
राजा की कृपा या भगवान की कृपा ? कनपुरी के राजा का नाम सुंदरवस्दन था। वह हर क्षेत्र में कनपुरी के राजा का नाम सुंदरवस्दन था। वह हर क्षेत्र ....
जय और विजय (वैकुंठम के द्वारपालक) सृष्टि कर्ता ब्राह्म ने चार बच्चों सनक, सनंदन, सनातन तथा सनतकुमार का सृजन किया था। इन्होंने शाश्वत रूप से बालक ही रहने का ....
प्रेम ही भगवान को भाता है एक बार दूर्वास मुनि, देवताओं के शहर अमरावती में गये । पूरा शहर उत्सव शोभा से झलक रहा था। दुर्वास ने यहाँ उपस्थित ....
‘पूरी’ मंदिर की मूर्ति कलिंग देश के राजा ने भगवान जगनाव के लिए एक मंदिर बनवाया। उसने उसमें जगद्वाय की अति सुंदर मूर्ति का प्रतिष्ठापन करना चाहा। राज्ञ्च ने ....
भीम और हनुमान प्रवास के समय पाण्डव, नारायाणाश्रम नामक एक जगह में ठहरे हुए थे। एक दिन द्रौपदी ने एक अत्यंत सुंदर कमल के फूल को देखा था जिसके ....
कर्ण : श्रेष्ठ दाता एक वार भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा ‘हे अर्जुन ! तुम धनुर्विद्या में श्रेष्ठ हो सकते हो, लेकिन दान देने में कर्ण का समवर्ती कोई ....