पूंतनम् : श्रेष्ठ भक्त भगवान गुरुवादुग्धन के भक्तों में पुतनम् श्रेष्ठ कहा जा सकता है। नारायणीयम् कवचम् के प्रणेता भइतिरि नंदूधरी जो पुंतनम् दोस्त थे, उन्होंने इनको एक अंगूठी ....
स्कांद पुराण कांचीपुरम् के कुमरनकोट्टम् मंदिर में शिवाचार्य पुजारी थे। भगवान मुरुग (सुब्रह्मण्य स्वामी) के कटाक्ष से शिवाचार्य को कचेयष्पा नामक बेटा पैदा हुआ। बचपन से ही वह तमिल ....
अभिराम भट्ट मुक्कडयूर नामक एक गाँव में अभिराम भट्ट का जन्म हुआ था। यह ब्राह्मण था। वचपन से ही उन्होंने संगीत कला में अपनी प्रतिभा दिखाई। ये जगन्माता अभिगमी ....
रघुवंश का उद्भव दिलीप चक्रवर्ती निस्संतान थे। चक्रवर्ती तथा उनकी पत्नी सुदक्षिणा, वशिष्ठ महर्षि के आश्रम में जाकर वशिष्ठ महर्षि, जो सूर्यवंशीय राजाओं के गुरू थे, उनका दर्शन किया। ....
श्रम का फल मीठा एक बार, एक ब्राह्मण अपने राजा के पास जाकर, अपनी बेटी की विवाह के लिए पैसों की मदद माँगी। राजा ने कोषाधिकारी से कहा कि ....
एकनाथ और कोढ़ी एकनाथ नामक एक भक्त को अपने पिताजी की अंत्येष्टि करना था । परंपरा के अनुसार ब्राह्मणों को भोजन खिलाना था । लेकिन, एकनाथ ने गरीब व ....
जयदेव तथा अष्टपदी ‘गीतगोविन्दम्’ के रचनाकार जयदेव का जन्म पूरी के आसपास एक छोटे से ग्राम में हुआ था। वे कृष्ण के अनन्य भक्त थे। वे बहुचर्चित कवि भी ....
भक्त कनकदास कनकदास, श्रेष्ठ भक्त एवं कवि थे। उनका जन्म एक शिकारी के परिवार में हुआ था। कर्नाटक के धारवाड जिले के पाड़ा नामक गाँव में ये रहते थे। ....
शबरी (श्रीराम की भक्तिन) शबरी, भगवान श्रीरामचंद्र की श्रेष्ठ भक्तिन थी। उसके पिता क्षत्रिय थे और माँ शिकारिन थी। उस का विवाह जब हुआ, तब उसके माँ पिताजी ने ....
श्रीभानुदास पंडरपुर में भानुदास नामक एक वस्त्र विक्रेता रहता था। वह भक्त था, साथ ही साथ बड़ा ईमान्दार व्यापारी भी था। जब भी कोई खरीदार / ग्राहक उसके दूकान ....