बवासीर नाशक मंत्र और यंत्र: बवासीर से छुटकारा पाने के उपाय

बवासीर नाशक मंत्र और यंत्र: बवासीर से छुटकारा पाने के उपाय” इस लेख में हम आपको बवासीर (पाइल्स) से राहत पाने के लिए मंत्र और यंत्र के महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेंगे। बवासीर, या पाइल्स, एक प्रमुख प्रकार की गुदा संबंधित समस्या है जिसमें गुदा के आसपास की नसों में सूजन और दर्द होता है। यह स्थिति बेहद तकलीफदेह हो सकती है और उपचार की जरूरत होती है।

इस लेख में, हम आपको बवासीर के लक्षण, कारण, और इसके उपचार के लिए मंत्र और यंत्र का क्या हे और उपयोग कैसे कर सकते हैं, इसकी जानकारी देंगे। आप यहां प्राचीन आयुर्वेदिक और तंत्रिक तरीकों का उपयोग करके बवासीर से छुटकारा पा सकते हैं और अपने जीवन को खुशहाली और स्वस्थ्यता से भर सकते हैं।

ध्यान दें कि किसी भी चिकित्सकीय सलाह का पालन करना हमेशा उचित होता है, और इस लेख में दी गई जानकारी को किसी चिकित्सक की सलाह के बिना न करें।

बवासीर के लक्षण (पाइल्स के लक्षण)

बवासीर के लक्षण (पाइल्स के लक्षण) निम्नलिखित हो सकते हैं:

  1. गुदा क्षेत्र में दर्द और खुजली: बवासीर के मरीजों को आमतौर पर गुदा क्षेत्र में दर्द और खुजली की समस्या होती है।
  2. रक्त के टपकना: बवासीर के कारण, गुदा क्षेत्र से रक्त के बूंदें टपक सकती हैं, जिसके कारण स्नायुशूल (ब्लीडिंग) हो सकता है।
  3. गुदा क्षेत्र में सूजन: बवासीर के मरीजों को गुदा क्षेत्र में सूजन की समस्या हो सकती है, जिसके कारण गुदा क्षेत्र फूल सकता है।
  4. गुदा क्षेत्र का फूलना: बवासीर के सबसे सामान्य लक्षणों में से एक यह है कि गुदा क्षेत्र में सूजन और फूलने की समस्या होती है, जिसके कारण गुदा क्षेत्र में बड़ा और लाती जाता है।
  5. मलद्वार्में स्थायी आसपास की नसें: बवासीर के विकास के साथ ही, मलद्वार्में स्थायी आसपास की नसें बन सकती हैं, जिनमें खून जमा हो सकता है।
  6. पेशाब और पाखान में दर्द: गुदा क्षेत्र की समस्याओं के कारण, पेशाब करने और पाखान करने में दर्द और तकलीफ हो सकती है।

अनियमितता और कब्ज: बवासीर के लक्षणों में से एक और भी है कि मल के खून की आसपासी बैलून के कारण अनियमितता और कब्ज की समस्या हो सकती है।

 बवासीर के ज्योतिष योग कुंडली लग्न

बवासीर होने के ज्योतिषीय  कारण एबं योग 

बवासीर का ज्योतिष योग कुंडली के आठवें भाव गुदा से जुड़ता है, और इसमें आठवें भाव के कारक ग्रह शनि की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शनि दुष्प्रभाव में होने पर गुदा संबंधित रोग हो सकते हैं। रक्त और पीड़ा के लिए कारक मंगल है, और बवासीर में ये दोनों महत्वपूर्ण होते हैं। कुंडली में अगर शनि, मंगल, लग्न, लग्नेश, अष्टम, और अष्टमेश के साथ दोषपूर्ण योग होते हैं, तो बवासीर का रोग हो सकता है। कुछ ऐसे ज्योतिष योग निम्नलिखित हैं:

  • शनि गुदा के आठवें भाव पर अशुभ ग्रहों की दृष्टि पड़ते हैं।
  • द्वादश भाव में स्थित शनि पर मंगल और लग्नेश की दृष्टि पड़ती है।
  • शनि लग्न में स्थित होते हुए मंगल सप्तम भाव में है और पूर्ण दृष्टि डालते हैं।

 

बवासीर के ज्योतिष योग कुंडली लग्न

बवासीर के ज्योतिष योग कुंडली के विभिन्न लग्नों में पाए जा सकते हैं। 

  1. मेष लग्न में, जब शनि बारहवें भाव में हो, मंगल छठे भाव में हो, और बुध अष्टम भाव में होते हैं, तो बवासीर का रोग हो सकता है।
  2. वृष लग्न में, जब गुरु चौथे भाव में हो, शनि दसवें भाव में हो, मंगल सप्तम भाव में हो, और शुक्र आठवें भाव में हो, तो जातक को बवासीर की समस्या हो सकती है।
  3. मिथुन लग्न में, जब गुरु और शनि की युति अष्टम भाव में हो, बुध और मंगल की युति चतुर्थ भाव में हो, तो बवासीर का रोग हो सकता है।
  4. कर्क लग्न में, जब शनि दसवें भाव में हो, मंगल पांचवे भाव में हो, बुध आठवें भाव में हो, और चन्द्र-शुक्र की युति आठवें भाव में हो, तो जातक को गुदा संबंधित रोग या बवासीर हो सकती है।
  5. सिंह लग्न में, जब शनि पहले भाव में हो, और बुध-मंगल की युति सातवें भाव में हो, सूर्य छठे भाव में हो, और शुक्र आठवें भाव में हो, तो जातक को बवासीर हो सकती है।
  6. कन्या लग्न में, जब चन्द्र-मंगल आठवें भाव में युत हों, शनि तीसरे भाव में हो, बुध बारहवें भाव में हो, तो जातक को बवासीर की समस्या हो सकती है।
  7. तुला लग्न में, जब गुरु आठवें भाव में हो, शनि सातवें भाव में लग्नेश और मंगल के साथ युत हो, चन्द्र तीसरे भाव में हो, तो जातक को गुदा संबंधित रोग से कष्ट हो सकता है।
  8. वृश्चिक लग्न में, जब मंगल दूसरे भाव में हो, शनि-बुध की युति आठवें भाव में हो, और गुरु बारहवें भाव में हो, तो जातक को गुदा संबंधित रोग हो सकता है।
  9. मकर लग्न में, जब गुरु पहले भाव में हो, बुध-शनि आठवें भाव में हो, मंगल पांचवे भाव में हो, तो जातक को बवासीर हो सकती है।
  10. कुम्भ लग्न में, जब शनि एकादश भाव में हो, मंगल पांचवे भाव में हो, और गुरु-चन्द्र आठवें भाव में हो, तो जातक को गुदा संबंधित रोग हो सकती है।
  11. मीन लग्न में, जब शनि आठवें भाव में हो, बुध के साथ युत हो, मंगल-शुक्र पांचवे भाव में हो, और गुरु एकादश भाव में हो, तो जातक को गुदा संबंधित रोग हो सकती है।
  12. कुंडली में इन योगों के माध्यम से आप जान सकते हैं कि किसी व्यक्ति को बवासीर का रोग हो सकता है और इसका परिणाम कब हो सकता है।

 

 

बवासीर नाशक मंत्र ।Piles Destructor Shabar Mantra

पहला मंत्र – बवासीर नाशक शाबर मंत्र । बवासीर नाशक मंत्र

ॐ नमो आदेस कामरू कामाक्षा देवी को भीतर बहर बोलूँ सुन देकर मन तूं काहे जलावत केहि कारण रसहित पर तूं डूमर में विख्यात रहे ना ऊपर ‘…’ के गात नरसिंह देव तोसे बोले बानी अब झट से हो जा तूं पानी आज्ञा हाड़ी दासी, फुरो मन्त्र चण्डी उवाच ।

इस मन्त्र को पढ़ते हुए रोगी को तीन बार प्रतिदिन झारें। यह क्रिया १५ दिन लगातार की जाय । प्रतिदिन प्रातः सायं रोगी को ३ – ३ बार मन्त्र पढ़कर झारते रहें । इसके प्रभाव से बवासीर नष्ट हो जाती है। के स्थान पर रोगी का नाम लें।

 

दूसरा मंत्र – बवासीर dur ke liye mantra बवासीर नाशक मंत्र

ईसा ईसा ईसा काँच कपूर चोर के शीशा अलिफ अक्षर जाने नहिं कोई खूनी वादी दोनों न होई, दुहाई तख्त सुलेमान बादशाह की ।

एक लोटे में ताजा शुद्ध जल लें। यह मन्त्र पढ़कर उस पर फूँक मारें। ऐसा तीन बार करें वह जल रोगी को दे दें। वह उसे शौच क्रिया में इस्तेमाल करें। तो चालीस दिनों में लाभ होगा। 

 

तीसरा मंत्र – बवासीर नाशक मंत्र

ॐ छद छुह छलक छलाई हुं हुं क्लं क्लां क्लीं हूं।

ऊपर लिखी गई विधि के अनुसार इसमें भी एक लोटा जल को सात बार यह मन्त्र पढ़कर सिद्ध कर लें, फिर वह जल रोगी को दे दें। ऐसे मन्त्रसिद्ध जल को शौच – क्रिया में नित्य प्रयोग करने से बवासीर नष्ट हो जाता है।

 

चौथा मंत्र – बवासीर से मुक्ति पाने के मंत्र ।  बवासीर नाशक मंत्र

“ॐ काकाता करोड़ कर्ता ॐ काकाता से होय, यरसाना दश हंस प्रकटे खूनी बड़ी सुंदरता न होय, मंत्र जानके न बताएं द्वादश ब्रह्म हत्या का पाप होय, एक लाख जप करें तो उसके वश में न होय, शब्द सांचा, पिंड कांचा, हनुमान का मंत्र सांचा, फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।”

इस मंत्र को होली, दीपावली या ग्रहण काल में 108 बार जपकर सिद्ध करना चाहिए और फिर रोजाना 21 बार पानी में जप करना चाहिए। इस क्रिया को 7 से 21 दिनों तक करने से बवासीर का पलायन हो सकता है। जब व्यक्ति पूरी तरह से ठीक हो जाता है, तो हनुमान जी का प्रसाद बाँटना चाहिए, जिससे हनुमान जी प्रसन्न होते हैं।

पांचवा मंत्र – बवासीर नाशक मंत्र

“ॐ उमती उमती चल चल स्वाहा।”

इस मंत्र को ग्रहण काल ​​में 108 बार जप करने के बाद, 21 बार जप करके लाल रंग के सूत में तीन कपड़ों को बांधकर मरीजों के पैर के हुक में लगाएं।”

विशेष टिप: साबर मंत्रों में एक ही लक्ष्य की प्राप्ति के कई मंत्र हैं, जैसा कि कई लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए कुछ सामान्य मंत्र बताए गए हैं। यदि मंत्र को ग्रहण करते समय उसके अर्थ का अध्ययन न करें, बल्कि उसी स्थिति में जप करें, तो यह मंत्र बेहतर प्रभावित हो सकता है। साबर मंत्र अक्सर ग्रामीण भाषा में होते हैं, इसलिए आपको उनके अर्थ का अध्ययन नहीं करना चाहिए। बस उनका जप करने में विश्वास और समर्पण के साथ जारी रखना चाहिए।”

 

बवासीर नाशक यंत्र

“बवासीर नाशक यंत्र “ एक विशेष उपकरण  है जो बवासीर के उपचार में मदद कर सकता है। यह यंत्र विभिन्न प्रकार की बवासीर की समस्याओं को दूर करने और आराम प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया जाता है। इसका उपयोग बवासीर के लक्षणों को कम करने और इस समस्या से निजात पाने में सहायक है। बवासीर नाशक यंत्र कुछ  इस प्रकार हे –

Piles destructor Shabar yantra-बवासीर नाशक यंत्र

 

इस यंत्र को कोई भी शुभ मुहूर्त में, गुरु पुष्य योग में अथबा कोई सर्वार्थ सिद्धि योग में  सुद्ध कागज में निम्बू के रॉस से लिखकर अपने कमरे बांधे। इससे बवासीर बीमारी से लाभ मिलेगा।

 

बवासीर नाशक शाबर मंत्र Pdf Downlaod 

 


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